19 अक्टूबर 2020

बेरोजगार जेबीटी की भर्ती करके राहत देने की मांग



जेबीटी बैचवाईज भर्ती इस दिन से होगी काउंसलिंग

जेबीटी के 17 पदों पर भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों के लिए बैच वाइज भर्ती की जाएगी । इसके लिए उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा शिमला कार्यालय में 27 अक्तूबर को प्रातः 10:30 बजे से काउंसलिंग प्रक्रिया होगी। 


जेबीटी के 17 पदों के लिए भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों से सामान्य वर्ग में 9, अनुसूचित जाति वर्ग में चार, अनुसूचित जनजाति वर्ग में एक, और ओबीसी वर्ग में 3 पद बैचवाईज भरे जाएंगे।
काउंसलिंग के लिए अभ्यर्थियों को अपने साथ दस्तावेजों को लाने के निर्देश दिए गए हैं। 


शिक्षा उपनिदेशक भागचंद ने बताया कि जेबीटी अध्यापकों के 17 पद अनुबंध आधार पर भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों से जो पद भर्ती द्वारा भरे जाने संभावित है अब इन पदों को बैच वाइज भरने की के लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं । 



 उपदेशक ने बताया कि क्योंकि टेट मेरिट की अवधि 30 सितंबर को पूर्ण हो चुकी है ऐसे में टेट मेरिट जो 9 सितंबर को आयोजित की थी व जिन अभ्यर्थियों ने इस काउंसलिंग में भाग लिया था ,उन्हें द्वारा काउंसलिंग में आने की आवश्यकता नहीं है उन्होंने बताया कि 27 अक्तुबर को होने वाली भर्ती के लिए शेष बचे हुए पात्र अभ्यर्थी काउंसलिंग में आ सकते हैं



 

18 अक्टूबर 2020

जेबीटी टीजीटी व अन्य भर्तियो में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते में मांगा जबाब

 

प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में सामान्य वर्ग के बीपीएल परिवारों को दिए गए 8 फ़ीसदी कोटे को आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को दिए गए 10 फ़ीसदी कोटे में समाहित करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 

वहां 16 अक्टूबर को इसकी सुनवाई हुई और कोर्ट ने याचिका को उचित ठहराते हुए प्रदेश सरकार से 4 सप्ताह के भीतर इस मामले को लेकर जवाब मांगा है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में होगी हालांकि हाईकोर्ट द्वारा इससे पहले याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके चलते याचिकाकर्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसे अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है

मुख्य अध्यापकों के 425 पद खाली



 

कंडक्टर ही नहीं, कलर्क परीक्षा में भी पेपर की फोटो खींचते पकडा


https://www.jobsoftoday.in/2020/10/blog-post_20.html?m=1

कंडक्टर भर्ती विवादों में, सीएम ने दिये जांच के आदेश

 




कोरोना के बीच स्कूल खोलने का फैसला इतनी जल्दी क्यों

स्कूलों को खोलने को लेकर जिस तरह प्रदेश सरकार हड़बड़ी दिखा रही है उसे लगता है कि सरकार व अधिकारी खुद संक्रमण को बढ़ावा देने का न्योता दे रहे हैं। यह बात पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सुधीर शर्मा ने प्रेस बयान में कही उन्होंने कहा पिछले 6 माह तक केंद्र सरकार शैक्षणिक संस्थानों को खोलने के लिए अपने निर्णय को लागू करती रही। लेकिन जब कोरोना हर जगह फैल गया तो केंद्र ने राज्यों को शैक्षणिक संस्थान खोलने के लिए अधिकृत कर दिया और खुद अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया।

प्रदेश में भी सरकार व शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को अपने जोखिम पर बच्चों को स्कूल भेजने के तुगलकी निर्देश जारी कर दिए अभिभावकों से किसी कागज पर हस्ताक्षर करवा कर यह कह देना कि अभिवावक बच्चों को भेजने के लिए तैयार हैं। अभिभावकों को यह पता नहीं कि जो शपथ पत्र लिया जा रहा है उसमें लिखा है यदि बच्चों को करोना होता है तो वह खुद ही जिम्मेदार होंगे। इसी तरह उन शिक्षकों को गैर शिक्षकों के लिए भी कोई बचाव नियम जारी नहीं किए गए जो पहले से गंभीर असाध्य रोगों से ग्रस्त हैं सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है

नियमित कक्षाओं को शुरू करने के नहीं आदेश, सहमति पत्र जरूरी : शिक्षा विभाग

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सोमवार से 10वीं और 12वीं बोर्ड की नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। शिक्षा मंत्री ने उसकी मौके को आदेश दिए थे। हालांकि शिक्षा निदेशालय की ओर से अभी तक इसके कोई लिखित आदेश स्कूलों को नहीं भेजे गए हैं।


। ऐसे में स्कूल और बच्चे दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं उत्तर शिक्षा विभाग का कहना है कि पुराने आदेश में ही स्थिति स्पष्ट कर दी कर दी थी इसके अनुसार जितने भी बच्चे स्कूल आना चाहते हैं आ सकते हैं इसके लिए उन्हें अभिवावकों का सहमति पत्र लाना जरूरी होगा

रदद् हो कंडक्टर भर्ती ; बाली

 

कंडक्टर भर्ती पेपर लीक मामले में पूर्व मंत्री जीएस बाली ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि कर्मचारी चयन आयोग पेपर करवा रहा है तब भी लीक हो रहा है तो यह शर्म की बात है।

उन्होंने कहा कि सरकार को मामले की जांच करनी चाहिए कि कैसे पेपर लीक हुआ और कैसे स्क्रीनशॉट बाहर आया। सोशल मीडिया अकाउंट से जारी बयान में बाली ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या और लगातार बढ़ती जा रही है और जो लोग मेहनत कर पेपर देने जाते हैं उनका विश्वास सरकार से उठ गया है।

बाली ने कहा उनके कार्यकाल में होने वाली हर बार हर भर्ती को लेकर भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए लांछन लगाए थे। भाजपा ने भर्ती रुकवाने के मामले कोर्ट तक पहुंचाएं लेकिन आखिर में कोर्ट से भी हर तरह की क्लीन चिट मिली थी। पूर्व मंत्री ने कहा कि अब भाजपा की सरकार है तो भर्तियों में गड़बड़झाला सामने आ रहे हैं सरकार प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की चिंता ना कर बाहरी लोगों को नौकरी दे रही है केंद्रों से परीक्षा के दौरान ही प्रश्न पत्र बाहर आ रहे हैं

आज से स्कूल आएंगे 10 वीं और 12 वीं के विद्यार्थी

 

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सोमवार से दसवीं और बारहवीं के बच्चे अभिभावकों की सहमति से स्कूल आ पाएंगे। दसवीं कक्षा में दो से तीन सेक्शन बनाए जाएंगे ताकि शारीरिक दूरी के नियमों की पालना हो सके इसी तरह प्लस टू कक्षा में चार अलग-अलग स्ट्रीम है मेडिकल नॉन मेडिकल कामर्स, और आर्टस।

आर्ट्स में सबसे ज्यादा दाखिले हैं स्कूल प्रधानाचार्य का कहना है कि अंग्रेजी विषय में ज्यादा बच्चे होते हैं बाकियों में संख्या कम हो जाती है वहां पर 20 से ज्यादा बच्चे हो जाएंगे वहां पर अलग सेक्शन बना दिया जाएगा। ऐसे में शारीरिक दूरी के नियमों की पालना करवाने में किसी तरह की दिक्कत पेश नहीं आएगी।

छोटे बच्चों को अभी नहीं बुलाया गया है स्कूल। पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं ही जारी रहेगी छोटे बच्चों में समाजिक दूरी बनाए रखना बेहद मुश्किल है ऐसे में बच्चों को बुलाए जाने का नहीं लिया जाएगा।

हिमाचल में आरक्षण हो बंद , बिलासपुर में उठी आवाज

 सरकार द्वारा जातिगत आरक्षण को तुंरत ही बंद करना चाहिए। यही नहीं अंतरजातीय विवाह पर सरकार द्वारा दी जाने वाली अढ़ाई लाख रुपये की राशि भी बंद की जानी चाहिए। वहीं, आरक्षण जाति आधार पर नहीं आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।
रविवार को सामान्य वर्ग की समस्याओं को लेकर सामान्य वर्ग संयुक्त मंच की राज्य स्तरीय बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता अमर सिंह गुलेरिया ने की। इसमें प्रदेश के सभी सामान्य वर्ग के संगठनों विशेषकर ब्राह्मण सभा, महाजन सभा, खत्री सभा, राजपूत व क्षत्रिय सभा, नामधारी संगत व आहलूवालिया सभा आदी के विरिष्ट पदाधिकारियों ने बढ़-चढक़र भाग लिया और सामान्य वर्ग से जुड़ी सभी ज्वलंत समस्याओं पर गहन चिंतन करके अगली रणनीति की रूपरेखा तैयार की। बैठक में प्रदेश सरकार ने हाल ही में सामान्य वर्ग के बीपीएल परिवारों को दिए गए सात फीसदी कोटे को आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को दिए गए 10 फीसदी कोटे में समाहित करने पर कड़ी निंदा की गई। वहीं, एससीएसटी वर्ग के लिए इसे अलग से ही रहने दिया है।


साथ ही बाहरी राज्यों के एससीएसटी व जनरल कैटेगरी के लोगों के अ यर्थियों को हिमाचल के सामान्य वर्ग के कोटे में नौकरियां प्रदान करने का भी विरोध किया गया।
प्रदेश अध्यक्ष केएस ज बाल ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार केवल 25 फीसदी एससी एसटी वर्ग के तुष्टीकरण के नाम पर 75 फीसदी सामान्य वर्ग के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार एससी एसटी एक्ट के अंतर्गत दायर मुकद्दमो पर करोड़ों रुपए का अंधाधुंध खर्च कर रही है। जोकि सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के हितों के साथ खिलवाड़ सहन नहीं होगा। केंद्र व प्रदेश सरकार को इस ओर उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आरटीआई से मिली सूचना के अनुसार प्रदेश सरकार ने 2018-2019 में 3.35 करोड,2019-20में 2.90 करोड रुपए की राशि एससीएसटी मुकद्दमों पर खर्च की है।


कंडक्टर भर्ती परीक्षा : पेपर वायरल करने वाला अभ्यर्थी पुलिस के हवाले, लीक की जांच

 हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की ओर से संचाल‍ित की गई (एचआरटीसी) हिमाचल पथ परिवहन निगम कंडक्‍टर भर्ती की लिखित परीक्षा विवादों में आ गई है।
परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही प्रश्‍न पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया। कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन ब्रिगेडियर सतीश कुमार ने बताया एपीजी यूनिवर्सिटी शिमला में एक अभ्‍यर्थी मोबाइल लेकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। इसी अभ्‍यर्थी ने यह शरारत की है। जब तक उसे प्रश्नों के जवाब मिलते तब तक उसे पकड़ लिया गया। परीक्षा ड्यूटी दे रहे अधिकारियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। छोटा शिमला थाना से पुलिस मौके पर पहुंच गई है। पुलिस अधीक्षक मोहित चावला खुद भी मौके पर पहुंचे

चेयरमैन ने कहा अन्‍य सभी केंद्रों पर सफलता पूर्वक परीक्षा का संचालन हुआ है। यह शरारत करने वाले अभ्‍यर्थी के खिलाफ आवश्‍यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 568 पदों के लिए 50 हजार से अधिक अभ्‍यर्थियों ने परीक्षा दी है। एएसपी शिमला परवीर ठाकुर ने भी मामले की पुष्‍ट‍ि की है। पुलिस अभ्‍यर्थी से पूछताछ कर रही है।


कल से नियमित कक्षाएं नहीं लगेंगी : शिक्षा निदेशालय

प्रदेश के क स्कूलों में नियमित कक्षाओं को शुरू करने का फैसला फिलहाल नहीं हुआ है ।
17 अक्टूबर को शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेशों में साफ कहा गया है कि ऑनलाइन स्टडी जारी रहेगी । सिर्फ वही बच्चे स्कूल में आ सकेंगे जिन बच्चों के माता-पिता लिखित में सहमति देंगे कि अगर करोना बीमारी हो जाती है तो उसके लिए अभिभावक जिम्मेदार होंगे । शिक्षा निदेशालय ने 17 अक्टूबर को समूह उप शिक्षा अनुदेशकों को यह आदेश जारी किये हैं ।

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