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बीएड और डीएलएड को एक समान माने : हाईकोर्ट

 पटना हाईकोर्ट ने राज्य में प्राइमरी स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षक बहाली मामले के एक महत्वपूर्ण फैसले में बीएड डिग्री धारकों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने राज्य सरकार को डीएलएड और बीएड डिग्रीधारकों को एक समान मानते हुए एक ही मेरिट लिस्ट बनाने को कहा है। आदेश दिया कि इसी मेरिट लिस्ट के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीएड डिग्रीधारी करीब 50 हजार अभ्यर्थियों को फायदा होगा। पटना हाईकोर्ट ने हरे राम कुमार एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था। बुधवार को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में राज्य सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसमें डीएलएड उम्मीदवारों को बहाली में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया था। साथ ही यह कहा गया था कि इसके बाद पद रिक्त रहने पर ही बीएड उम्मीदवारों की बहाली की जाएगी। साथ ही नियोजित शिक्षकों की वरीयता सूची अलग-अलग तैयार की जायेगी। बीएड उम्मीदवारों को नियुक्ति की तिथि से दो वर्ष के भीतर छह माह का सेतु पाठ्यक्रम पास करना होगा। पास होने की तारीख से वे प्रशिक्षित माने जायेंगे। विभाग के इसी आदेश की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।


सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के इस आदेश को फिलहाल भेदभावपूर्ण मानते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के खिलाफ है। साथ ही शिक्षा विभाग के आदेश को अस्वीकार करते हुए बीएड डिग्री धारकों को भी शामिल कर एक ही मेरिट लिस्ट बना बहाली करने का निर्देश दिया। 

कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया था फैसला

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आशीष गिरि ने कोर्ट के समक्ष पक्ष पेश किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकारते हुए यह फैसला दिया। इससे पहले कोर्ट ने शिक्षा विभाग के 17 दिसम्बर 2019 के आदेश पर रोक लगा दी थी। साथ ही जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए थे। लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। 



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